India

भारत में सांप्रदायिक प्रतिक्रिया के खिलाफ लड़ाई समाजवाद की लड़ाई है

कीथ जोन्स, २१ दिसम्बर २०१९

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने 12 दिसंबर को संसद में ज़बस्दस्ती मुस्लिम विरोधी संवैधानिक संशोधन अधिनियम (CAA) को निकसित किआ जिस कारण विरोध प्रदर्शनों की बढ़ती लहर ने भारत को आक्षेपित कर दिआ है।

नए हिंदूवादी नागरिकता अधिनियम के खिलाफ भारत भर में विरोध प्रदर्शन

रोहंत दे सिलभा, १६ दिसम्बर २०१९

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 के खिलाफ पूरे भारत में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं I CAA को पिछले हफ्ते सत्तारूढ़ हिंदू सुप्रीमो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संसद में सिर्फ चार दिनों के अंदर हड़बड़ी में उत्तीर्ण किया था।

कश्मीर पर नई दिल्ली का हमला और सांप्रदायिक प्रतिक्रिया, साम्राज्यवाद और युद्ध के खिलाफ लड़ाई

कीथ जोन्स, १० अगस्त २०१९

पिछले सोमवार(5 अगस्त) परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों भारत व पाकिस्तान के बीच 70 साल पुरानी सैन्य-रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता का केंद्र रहे तथा भारत द्वारा नियंत्रित कश्मीर क्षेत्र के भूभाग से भारतीय हिंदूवादी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर (J& K)की‘अर्द्ध’-स्वायत्तस्थिति को अवैध रूप से समाप्त कर दिया गया।

भारत द्वारा पाकिस्तान पर बमबारी, इस्लामाबाद द्वारा सैन्य कार्रवाई की चेतावनी

वसंथा रूपासिंघे, २७ फ़रवरी २०१९

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद पहली बार भारत द्वारा मंगलवार सुबह पाकिस्तान सीमा के अंदर एक हवाई हमले को अंजाम दिया गया। इस हमले ने दक्षिण एशिया के चिर-प्रतिद्वंद्वी व परमाणु-शक्ति सम्पन्न देशों के बीच तनाव को उबाल दिया है।

सामाजिक विनाश और उन्नति रोधक राजनीतिक चालों से निबटने के लिए भारतीय श्रमिकों को क्रांतिकारी समाजवादी कार्यक्रम की ज़रूरत

दीपल जयसेकरा एवं कीथ जोन्स द्वारा, ८ जनवरी २०१९

वर्ल्ड सोशलिस्ट वेब साइट भाजपा सरकार से टक्कर लेने के लिए श्रमिकों द्वारा किसी भी जोखिम जैसे वित्तीय बलिदान और यहां तक कि गोलीबारी का सामना करने को भी तैयार रहने के दृढ़ निश्चय का स्वागत करती है।

फंसाए गए मारुति सुज़ुकी मज़दूरों के रिहाई के संघर्ष में जुड़ें!

Socialist Equality Party (Sri Lanka), २५ मार्च २०१७

सोशिलिस्ट ईक्वालिटी पार्टी और चौथा अंतरराष्ट्रीया विश्व कमिटी का श्री लंकाई खंड मार्च 18को एक भारतीय अदालत द्वारा मारूति सुज़ुकी के मज़दूरों के खिलाफ दी गयी सज़ा — 13 मज़दूरों को उम्रकैद और 18 को तीन से पाँच साल की क़ैद — का सख़्त विरोध करता है.